सपना सही सलामत है
इन्द्रधनुष जैसी सतरंगी दुनिया सही सलामत है
आँखे उजाड़ गयी तो क्या बस सपना सही सलामत है,
जिसका इक इक तिनका यारो वर्षों पहले बिखर गया,
मेरी नजरों में उस घर का नक्षा सही सलामत है,
हालातों ने कील ठोंक दी बेशक मेरे सीने में,
मगर गाँव में जाकर कहना सब कुछ सही सलामत है,
जिसके शब्द शब्द को हमने आंसू जल से लिख्खा है,
उस किताब का अब तक पन्ना पन्ना सही सलामत है,
आने वाला वक्त गढ़ेंगे हम ख़ुद अपने हांथों से,
तन का संबल टूट गया पर मन का सही सलामत है
मित्र संजय सक्सेना झाबुआ के भेजे हुए शुभकामना संदेश से ........
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